देखिये महिलाओ ने आज कैसे मनाया गणगौर का त्यौहार,जानिए क्या है गणगौर का त्यौहार

शिवपुरी।आज मारवाड़ी अग्रवाल समाज की महिलाओ ने नाच गा कर जलूस के रूप में मनाया गणगौर का त्यौहार।यह जुलुस कस्टम गेट सीत...


शिवपुरी।आज मारवाड़ी अग्रवाल समाज की महिलाओ ने नाच गा कर जलूस के रूप में मनाया गणगौर का त्यौहार।यह जुलुस कस्टम गेट सीताराम मंदिर से शुरू हो कर मीट मार्किट रोड स्थित पंचायती बगीचे पर समाप्त हुआ।इस बीच जगह जगह लोगो ने जुलुस का पुष्प बरसा के और कोल्ड्रिंक व् आइस क्रीम खिला कर स्वागत भी किया।अंत में पंचायती बगीचे पहुंच महिलाओ ने शिव जी व् पार्वती जी की पूजा की पूजा करते हुए दुब के पानी के छींटे दिए साथ ही गौर गौर गोमती गीत भी गया।इस पूजा को विवाहित व् अविवाहित महिलाये करती है।अविवाहित लड़कियां यह पूजा करके मनपंसद वर पाने की कामना करती है।और विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।


जानिए गणगौर के त्यौहार के बारे में-


गणगौर राजस्थान एवं सीमावर्ती मध्य प्रदेश का एक त्यौहार है जो चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीज) को आता है। इस दिन कुँवारी लड़कियाँ एवं विवाहित महिलाएँ शिवजी (इसर जी) और पार्वती जी (गौरी) की पूजा करती हैं। पूजा करते हुए दूब से पानी के छींटे देते हुए "गोर गोर गोमती" गीत गाती हैं। इस दिन पूजन के समय रेणुका की गौर बनाकर उस पर महावर, सिन्दूर और चूड़ी चढ़ाने का विशेष प्रावधान है। चन्दन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है।गण (शिव) तथा गौर (पार्वती) के इस पर्व में कुँवारी लड़कियाँ मनपसन्द वर पाने की कामना करती हैं। विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।


होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, 18 दिनों तक चलने वाला त्योहार है -गणगौर। यह माना जाता है कि माता गवरजा होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं तथा अठारह दिनों के बाद ईसर (भगवान शिव ) उन्हें वापस लेने के लिए आते हैं ,चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है।गणगौर की पूजा में गाये जाने वाले लोकगीत इस अनूठे पर्व की आत्मा हैं। इस पर्व में गवरजा और ईसर की बड़ी बहन और जीजाजी के रूप में गीतों के माध्यम से पूजा होती है तथा उन गीतों के बाद अपने परिजनों के नाम लिए जाते हैं। राजस्थान के कई प्रदेशों में गणगौर पूजन एक आवश्यक वैवाहिक रस्म के रूप में भी प्रचलित है।गणगौर पूजन में कन्याएँ और महिलाएँ अपने लिए अखण्ड सौभाग्य, अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से हर वर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं।


जाइये क्यों रखा जाता है गणगौर का व्रत-

एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती एवं नारद जी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए। वह चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में पहुंचे। उनका आना सुनकर ग्राम कि निर्धन स्त्रियां उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी व अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरंत पहुंच गई । पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। वे अटल सुहाग प्राप्त कर लौटी।थोड़ी देर बाद धनी वर्ग की स्त्रियां अनेक प्रकार के पकवान सोने चांदी के थालो में सजाकर सोलह श्रृंगार करके शिव और पार्वती के सामने पहुंची। इन स्त्रियों को देखकर भगवान शंकर ने पार्वती से कहा तुमने सारा सुहाग रस तो निर्धन वर्ग की स्त्रियों को ही दे दिया। अब इन्हें क्या दोगी? पार्वती जी बोली प्राणनाथ! उन स्त्रियों को ऊपरी पदार्थों से निर्मित रस दिया गया है ।इसलिए उनका सुहाग धोती से रहेगा। किन्तु मैं इन धनी वर्ग की स्त्रियों को अपनी अंगुली चीरकर रक्त का सुहाग रख दूंगी, इससे वो मेरे सामान सौभाग्यवती हो जाएंगी। जब इन स्त्रियों ने शिव पार्वती पूजन समाप्त कर लिया तब पार्वती जी ने अपनी अंगुली चीर कर उसके रक्त को उनके ऊपर छिड़क दिया जिस पर जैसे छींटे पड़े उसने वैसा ही सुहाग पा लिया।पार्वती जी ने कहा तुम सब वस्त्र आभूषणों का परित्याग कर, माया मोह से रहित होओ और तन, मन, धन से पति की सेवा करो । तुम्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी। इसके बाद पार्वती जी भगवान शंकर से आज्ञा लेकर नदी में स्नान करने चली गई । स्नान करने के पश्चात बालू की शिव जी की मूर्ति बनाकर उन्होंने पूजन किया।भोग लगाया तथा प्रदक्षिणा करके दो कणों का प्रसाद ग्रहण कर मस्तक पर टीका लगाया। उसी समय उस पार्थिव लिंग से शिवजी प्रकट हुए तथा पार्वती को वरदान दिया आज के दिन जो स्त्री मेरा पूजन और तुम्हारा व्रत करेगी उसका पति चिरंजीवी रहेगा तथा मोक्ष को प्राप्त होगा। भगवान शिव यह वरदान देकर अंतर्धान हो गए ।इतना सब करते-करते पार्वती जी को काफी समय लग गया। पार्वती जी नदी के तट से चलकर उस स्थान पर आई जहां पर भगवान शंकर व नारद जी को छोड़कर गई थी।शिवजी ने विलंब से आने का कारण पूछा तो इस पर पार्वती जी बोली मेरे भाई भावज नदी किनारे मिल गए थे। उन्होंने मुझसे दूध भात खाने तथा ठहरने का आग्रह किया।

COMMENTS

Name

HEALTH TIPS,1,अनूपपुर,1,अरूणाचल प्रदेश,3,अलीराजपुर,1,अशोक नगर,2,असम,2,आगर,1,आंध्र प्रदेश,1,इंदौर,10,उज्जैन,2,उड़ीसा,2,उत्तर प्रदेश,10,उत्तरप्रदेश,1,उत्तराखंड,2,उमरिया,2,कटनी,1,कपूरथला,1,कर्नाटक,2,केरल,1,कोरोना न्यूज़,1,कोलकाता,1,कौंच,1,खंडवा,1,खरगोन,1,खान-पान,1,खेल,7,गाजियाबाद,1,गुजरात,2,गुना,8,गुरुग्राम,1,गैजेट,1,गोवा,1,ग्वालियर,21,चंडीगढ़,1,चेन्नई,1,छतरपुर,2,छतीसगढ,3,छिंदवाड़ा,1,जबलपुर,4,जम्मू कश्मीर,1,जम्मू-कश्मीर,6,जागरूकता अभियान,1,झाबुआ,1,झारखंड,2,झाँसी,1,टीकमगढ़,2,टेक्नोलॉजी,10,डबरा,2,डिंडोरी,1,तमिलनाडु,2,तेलंगाना,1,त्रिपुरा,1,दतिया,10,दमोह,1,देवास,1,देश,29,धर्म,24,धार,3,नई दिल्ली,23,नरवर,1,नरसिंहपुर,1,नागालैण्ड,1,नीमच,1,नौकरी,14,पंजाब,4,पन्ना,1,पश्चिम बंगाल,1,प्रतापगढ़,3,बजट अपडेट,8,बड़वानी,1,बालाघाट,1,बिलासपुर,1,बिहार,1,बुरहानपुर,1,बैतूल,1,बॉलीवुड,2,भारत,9,भिंड,1,भिण्ड,1,भिलाई,1,भोपाल,17,मऊ,1,मंडला,1,मणिपुर,1,मंदसौर,1,मध्य प्रदेश,29,मध्यप्रदेश,19,मनोरंजन,1,महाराष्ट्र,10,मिजोरम,1,मिलाजुला,1,मुम्बई,5,मुरैना,2,मेघालय,1,मौसम अपडेट,4,रतलाम,3,राजगढ़,1,राजनीति,4,राजस्थान,2,रायसेन,1,रीवा,2,लखनऊ,1,लालगंज,1,लेख,5,लेख/विचार,1,विदिशा,1,विदेश,4,शहडोल,1,शाजापुर,5,शिवपुरी,521,श्योपुर,7,सतना,1,सागर,1,सामान्य ज्ञान की बातें,2,सिक्किम,1,सिंगरौली,1,सिवनी,1,सीधी,2,सीहोर,1,हरदा,2,हरियाणा,6,हिमाचल प्रदेश,1,हैदराबाद,1,होशंगाबाद,1,
ltr
item
Kalam Tak - Sach Har Keemat Par: देखिये महिलाओ ने आज कैसे मनाया गणगौर का त्यौहार,जानिए क्या है गणगौर का त्यौहार
देखिये महिलाओ ने आज कैसे मनाया गणगौर का त्यौहार,जानिए क्या है गणगौर का त्यौहार
https://lh3.googleusercontent.com/-Unh6CIsLdjM/YksNLimagzI/AAAAAAAADRU/vNp9--4WhdsKTCiw8dU5QesAHhWenQfuACNcBGAsYHQ/s1600/1649085739294413-0.png
https://lh3.googleusercontent.com/-Unh6CIsLdjM/YksNLimagzI/AAAAAAAADRU/vNp9--4WhdsKTCiw8dU5QesAHhWenQfuACNcBGAsYHQ/s72-c/1649085739294413-0.png
Kalam Tak - Sach Har Keemat Par
https://www.kalamtak.com/2022/04/blog-post_46.html
https://www.kalamtak.com/
https://www.kalamtak.com/
https://www.kalamtak.com/2022/04/blog-post_46.html
true
4605838333867640698
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share. STEP 2: Click the link you shared to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy